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' सोच विचार ' पत्रिका के संपादक नरेन्द्र नाथ मिश्र ने कहा कि इनकी ग़ज़लें आम आदमी की पहचान के साथ सोच विचार की जमीन भी तैयार करती है। गजलकारों में डॉ नसीमा 'निशा 'आशीक बनारसी ,सिद्धनाथ शर्मा आदि ने ग़ज़ल प्रस्तुत की।

' सोच विचार ' पत्रिका के संपादक नरेन्द्र नाथ मिश्र ने कहा कि इनकी ग़ज़लें आम आदमी की पहचान के साथ सोच विचार की जमीन भी तैयार करती है। गजलकारों में डॉ नसीमा 'निशा 'आशीक बनारसी ,सिद्धनाथ शर्मा आदि ने ग़ज़ल प्रस्तुत की।

‘ सोच विचार ‘ पत्रिका के संपादक नरेन्द्र नाथ मिश्र ने कहा कि इनकी ग़ज़लें आम आदमी की पहचान के साथ सोच विचार की जमीन भी तैयार करती है। गजलकारों में डॉ नसीमा ‘निशा ‘आशीक बनारसी ,सिद्धनाथ शर्मा आदि ने ग़ज़ल प्रस्तुत की। 

कार्यक्रम में आए हुए सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए संग्रह के लेखक अरुण कुमार केशरी ने कहा कि ग़ज़ल साहित्य की एक विधा है जो देश की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है। जो दिखता महसूस होता हैं, उसे काग़ज़ पर उतार देता हूं।अरुण कुमार केशरी के ग़ज़ल संग्रह अमानत-ए-अवाम के इस भव्य कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ माधवी तिवारी, श्रीमती मंजू व्यास, चेतना पांडे, आनंद तिवारी, बाबुल बनारसी, राजेश केसरी, कृष्ण दास केशरी, रामकृष्ण पांडे आदि उपस्थित होकर श्री अरुण केशरी जी को अपनी शुभकामनाएं दीकार्यक्रम संचालन सेंट्रल फाॅर सनातन रिसर्च के मीडिया प्रभारी श्री विकास बरनवाल ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक रामकृष्ण पांडेय ने किया। इस अवसर पर भारी संख्या में कवि एवं नगर के गणमान्य लोगों की उपस्थिति रहीं। 

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